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Showing posts from February, 2018

नदी के किनारे

एक  पत्थर  भी अगर पानी पर मारो
तो आवाज  होती हैं
पत्थर  मारना  कोई गलती नहीं होती
नदी के छोर  अक्सर तह  होते हैं
मगर पानी के बहाव सा कैसे बहे

कैसे उसकी लहारो में लेहरती  किरणो को पिरोयू
कैसे उसकी गहराहीयो को पहचानु
कैसे ना डरू उसके बहाव से
लगातार छुट्ते किनारे इस आज़ादी से

कभी आवनमना ना करना यही सिखा है
मगर जब संगीत बन जाता है
उस पार जाती हुई ये नदी
तो क्या मै केवल एक क्षण बन कर रह जाऊ
उसके किनारो पर|